पीलीभीत। जिले की 127 सदर विधानसभा की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मामले में आखिरकार भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने पीलीभीत SIR गड़बड़ी मामले में तत्कालीन एसडीएम एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। दोनों अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 जोड़ने और उनके आरोपपत्र आयोग को भेजने को भी कहा गया है। आयोग की पूर्व अनुमति के बिना दोनों अधिकारियों को बहाल नहीं किया जा सकेगा।

पीलीभीत SIR गड़बड़ी में क्या मिला?
यह मामला 127 सदर विधानसभा की पीलीभीत SIR गड़बड़ी (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद प्रकाशित मतदाता सूची में एपिक नंबर के सामने दूसरे मतदाता का विवरण प्रदर्शित होने की शिकायतों से सामने आया था। जांच में 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच 13,779 फॉर्म-8 की प्रविष्टियां दर्ज किए जाने का मामला सामने आया। इनमें 10,470 फॉर्म स्वीकृत मिले, जबकि 3,309 निरस्त किए गए। जांच में स्वीकृत सभी 10,470 प्रविष्टियों में अनियमितताएं पाई गईं। खास बात यह रही कि इन प्रविष्टियों से संबंधित मूल आवेदन पत्र और सहायक अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिले।
इस मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार समेत दोनों ईआरओ के खिलाफ पहले ही कोतवाली सदर में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। अब निर्वाचन आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने पीलीभीत की चारों विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की भी जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। साथ ही प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और ईआरओ को मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से संबंधित प्रविष्टियों की दोबारा जांच करने के निर्देश दिए हैं।
पीलीभीत SIR गड़बड़ी की शिकायतों के बाद खुला मामला
मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला सबसे पहले शहर निवासी अधिवक्ता फैजान अली की ओर से सामने लाया गया था। उन्होंने एपिक नंबर के सामने दूसरे मतदाता का विवरण प्रदर्शित होने का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया और जिलाधिकारी से शिकायत की। इसके बाद पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा, समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष और कांग्रेस नेताओं ने भी अलग-अलग स्तर पर शिकायतें दर्ज कराईं। नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले को उठाया और जिलाधिकारी को ज्ञापन के साथ साक्ष्य सौंपे। शिकायतों के बाद निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिला प्रशासन ने जांच कराई, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमित प्रविष्टियों की पुष्टि हुई।
मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी पर क्या कार्रवाई हुई?
एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही थी। इसी बीच दोनों के तबादले किए जाने के आदेश जारी हुए, जिस पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठे। विवाद बढ़ने के बाद तबादला आदेश निरस्त कर दोनों अधिकारियों को प्रतीक्षारत कर दिया गया। अब भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की कार्रवाई की गई है।
पूर्व और वर्तमान डीएम से भी मांगा स्पष्टीकरण
मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश ने वर्तमान जिलाधिकारी आलोक कुमार और पूर्व जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह से भी स्पष्टीकरण मांगा है। 30 अक्टूबर को जारी आधिकारिक जानकारी में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता सूची से संबंधित मैनुअल के प्रावधानों का हवाला दिया गया है। इसमें जिला निर्वाचन अधिकारी की मतदाता सूची की शुद्धता, निगरानी, समन्वय और गुणवत्ता नियंत्रण संबंधी जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में अब जांच का दायरा केवल दो ईआरओ और कंप्यूटर ऑपरेटर तक सीमित नहीं रह गया है।
पूरे प्रदेश की मतदाता सूचियों की होगी दोबारा जांच
पीलीभीत SIR गड़बड़ी प्रकरण के बाद निर्वाचन आयोग ने प्रदेशभर में मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और ईआरओ को फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के माध्यम से नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रविष्टियों की गहन जांच करने को कहा गया है। इसके अलावा ईआरओ कार्यालयों में कंप्यूटर ऑपरेटरों के पासवर्ड निष्क्रिय करने के भी निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।










