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पीलीभीत पावर ट्रांसफार्मर कांड: दो अधिशासी अभियंता सस्पेंड, लेकिन ‘इन’ पर मेहरबानी क्यों?

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रूपपुर कमालू

मुख्य अभियंता राघवेंद्र कुमार की दोहरी नीति पर उठे सवाल, उझानी में ट्रांसफार्मर जला तो चुप्पी साधी – रूपपुर कमालू में तुरंत एक्शन!

बरेली / पीलीभीत। एक नवंबर को रूपपुर कमालू के 132 केवी पावर हाउस में पावर ट्रांसफार्मर जलने की घटना के बाद विभाग में भूचाल आ गया है। लोकतंत्र टुडे में खबर प्रकाशित होने के बाद झटपट मुख्य अभियंता, जोन द्वितीय राघवेंद्र कुमार की “कुंभकर्णी नींद” खुली और 6 नवंबर को उन्होंने दो अधिशासी अभियंताओं पंकज भारती (वितरण खंड) और चंद्रभान सिंह (परीक्षण खंड) के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए निलंबन की सिफारिश भेज दी।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पीलीभीत में बिना जांच पूरी किए इतनी जल्दी एक्शन क्यों? और बदायूं में ट्रांसफार्मर डैमेज पर एक सप्ताह में भी एक्शन क्यों नहीं?

उझानी में 5 MVA ट्रांसफार्मर डैमेज, लेकिन मुख्य अभियंता ‘साइलेंट मोड’ में

21 नवंबर को बदायूं के उझानी में 5 एमवीए का ट्रांसफार्मर डैमेज हो गया, हजारों उपभोक्ता अंधेरे में, इधर-उधर से जुगाड़ चलाकर सप्लाई दी जा रही है। लेकिन मुख्य अभियंता राघवेंद्र कुमार के तेवर बर्फ से भी ठंडे।

मुख्य अभियंता राघवेंद्र ने बताया कि यह ट्रांसफार्मर गारंटी पीरियड में है, कंपनी बदलेगी। नए अधीक्षण अभियंता के ज्वाइन करने के बाद रिपोर्ट मंगाएंगे। बदायूं में डैमेज हुए ट्रांसफार्मर की रिपोर्ट नए अधीक्षण अभियंता के ज्वाइन करने के बाद मंगाने की बात करने वाले मुख्य अभियंता को आखिर पीलीभीत में बिना किसी जांच रिपोर्ट के निलंबन की जल्दी क्या थी। आपको बता दें कि अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि वितरण और ट्रांसमिशन विभाग में से किसके रखरखाव और किसकी गलती से पावर ट्रांसफार्मर जला था। लेकिन मुख्य अभियंता ने दो अधिशासी अभियंताओं पर कार्यवाही करने के लिए लिख दिया।

क्यों उठ रहे सवाल? जवाब इस ‘गणित’ में छिपा

विभागीय सूत्रों के अनुसार, राघवेंद्र कुमार के पंकज भारती सबसे प्रिय अधिशासी अभियंता माने जाते थे लेकिन जब से उन्हें अधीक्षण अभियंता का अतिरिक्त चार्ज मिला। नजदीकियां दूरियों में बदल गई। पंकज भारती उनकी संभावनाओं पर उतने खरे नहीं उतर पाए जितना चीफ इंजीनियर को थी। जिसका कारण बेहतर हिसाब–किताब न रख पाना बताया जा रहा है।

वहीं दूसरी तरफ चर्चाओं का बाज़ार गर्म है कि उझानी में तैनात अधिशासी अभियंता देवेंद्र कुमार गुप्ता पहले अलीगढ़ में राघवेंद्र कुमार के अधीनस्थ रह चुके हैं, और मुख्य अभियंता उन पर खास मेहरबान हैं, इसलिए उझानी वाले ट्रांसफार्मर कांड पर चुप्पी। यही वजह है कि एक सप्ताह तक चीफ इंजीनियर भी चुप्पी साधे रहे।

 

पुराना इतिहास: ठेकेदार को बचाया, SDO पर गिरी गाज

बीते महीनों में बदायूं के बिल्सी में ट्रांसफार्मर जलने पर एक SDO के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई, जबकि मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ठेकेदार की थी, एसडीओ के कहने के बाद भी ठेकेदार फर्म मेंटेनेंस नहीं कर रही थी।
एसडीओ ने कई बार लिखित पत्र भेजकर ठेकेदार को काम करने को कहा था लेकिन विभागीय अधिकारियों ने गाज ठेकेदार पर गिराने के बजाय एसडीओ पर गिरा दी। जिसके चलते मुख्य अभियंता के दफ्तर के बाहर लंबे समय तक धरना चला और मुख्य अभियंता राघवेंद्र ने दफ्तर आना बंद कर दिया और कभी टूरिज्म स्पॉट चूका घूमने चले गए तो कभी दूसरे जिले मुआयने के नाम पर घूमते रहे।

 

अब जनता पूछ रही सवाल

पीलीभीत के इंजीनियरों पर बिजली क्यों गिरी और उझानी के इंजीनियरों पर दया क्यों?
ट्रांसफार्मर जलने की रिपोर्ट के बिना ही निलंबन का आधार क्या था? बताया जाता है कि पीलीभीत में जांच कमेटी दो कदम आगे चल नहीं पाई कि अपनी जान बचाने के लिए मुख्य अभियंता राघवेंद्र ने दो अधिशासी अभियंताओं के खिलाफ कार्यवाही के लिए चिट्ठी लिख दी।
क्या विभागीय कार्रवाई का पैमाना अब ‘यारी–दारी’ है, जवाबदेही नहीं? क्या पावर कॉरपोरेशन में कार्रवाई अब ‘सलेक्टिव टारगेटिंग’ का खेल बन चुकी है?
अगर पावर कॉरपोरेशन में सीनियर इंजीनियर ‘अपनों’ पर नरमी और ‘नापसंद’ पर बिजली गिराना जारी रखेंगे तो ट्रांसफार्मर ही नहीं — पूरी व्यवस्था जल जाएगी।

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