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लाइन शिफ्टिंग घोटाला : जांच रिपोर्ट का जैसा दोगे दाम, उतना ही मिलेगा आराम

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Sanjeev Sharma

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Bareilly News: पीलीभीत फोरलेन हाईवे निर्माण के दौरान बिजली लाइन शिफ्टिंग में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट अधीक्षण अभियंता को अब तक नहीं मिल पाई है, जबकि घोटाला सामने आने पर उन्होंने जांच कमेटी गठित कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा था मगर दो हफ्ते का समय बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। बताते हैं कि फर्म से मोलभाव चलने के चक्कर में जांच रिपोर्ट देने में देरी की जा रही है। जैसा सौदा पटेगा उसी हिसाब से रिपोर्ट बनाकर दी जाएगी।

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बरेली-पीलीभीत फोरलेन हाईवे निर्माण का ठेका एनएचएआई ने मैनपुरी की (Raj Corporation Ltd.) आरसीएल कंपनी को दिया है, इसके साथ ही करीब साढ़े 27 किलोमीटर बिजली की लाइन शिफ्ट करने का ठेका भी इसी अनुबंध में शामिल है। आरसीएल ने लाइन शिफ्टिंग के कार्य में सारे नियम ताक पर रखकर 80 फीसदी तक काम पूरा कर दिया।

लाइन शिफ्टिंग घोटाला

लाइन शिफ्टिंग में RCL ने सीमेंट और लोहे के जिन पोलों का इस्तेमाल किया, वह सरकारी सप्लाई के हैं, उन पर एमवीवीएनएल लिखा है। हालांकि जहां एमवीवीएनएल लिखा है उस हिस्से को सीमेंट से बाद में पोत दिया गया है। यही नहीं कंपनी ने काम शुरू करने से पहले लगने वाले सामान का प्री और पोस्ट इंस्पेक्शन भी नहीं कराया और एनएचएआई ने भी आंख मूंदकर फर्म को भुगतान कर दिया।

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घपले में इंजीनियर और ठेकेदार की मिलीभगत

पीलीभीत हाईवे पर लाइन शिफ्टिंग में घपला पावर कारपोरेशन के इंजीनियर, एनएचएआई के अधिकारी और RCL  के ठेकेदार की मिलीभगत से किया गया है। पोल खुलने के बाद पावर कारपोरेशन की ओर से दिखावे के लिए हाफिजगंज थाने में तहरीर दी गई लेकिन रिपोर्ट दर्ज कराने में दिलचस्पी नहीं ली गई क्योंकि अफसर भली भांति जानते हैं कि अगर एफआईआर के बाद जांच हुई तो आंच उन तक भी आएगी।
जांच में यह सवाल भी उठेगा कि लाइन शिफ्टिंग के दौरान शटडाउन किसके कहने पर दिया गया। यह किसके आदेश पर दिया गया, इस पर जवाब दे पाना मुश्किल होगा।

लाइन शिफ्टिंग घोटाला : अधीक्षण अभियंता ग्रामीण ने गठित की थी जांच कमेटी

बिजली लाइन शिफ्टिंग में घोटाला उजागर होने के बाद अधीक्षण अभियंता ग्रामीण ज्ञानेंद्र सिंह ने अधिशासी अभियंता आंवला विश्वास कुमार और अधिशासी अभियंता मीटर खंड धर्मराज के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन किया था और एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी लेकिन जांच कमेटी ने दो सप्ताह से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी अधीक्षण अभियंता को रिपोर्ट नहीं सौंपी है।

सूत्रों के मुताबिक कमेटी में शामिल कुछ अफसर RCL कंपनी को बचाने के लिए उसके कर्मचारियों से मोलभाव कर रहे हैं लेकिन अब तक सौदा पट नहीं पाया है। बताते हैं कि अगर सौदा पटा तो कंपनी के पक्ष में, नहीं तो खिलाफ रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी।

 

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