बरेली। शहर के स्टेडियम रोड स्थित खुशलोक अस्पताल से ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय लोगों को हिलाकर रख दिया है। अस्पताल के मुख्य गेट पर बने पोर्च के नीचे कई दिनों से एक लंगूर को रस्सी से बांधकर रखा गया, जिसे देखकर हर राहगीर दंग रह जाता है। तेज धूप, रात की ठंड और हर मौसम में यह लंगूर एक ही जगह बंधा पड़ा दिखाई देता है।
लंगूर के गले में बंधी मोटी रस्सी और शरीर पर डाला गया कपड़े का एक टुकड़ा उस स्थिति को और भी विचलित कर देता है, जो किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की नजर में सीधी पशु क्रूरता है। सबसे बड़ी बात, यह नज़ारा किसी सड़क किनारे नहीं बल्कि एक निजी अस्पताल के मुख्य पोर्च पर देखा गया।

BJP नेता डॉक्टर का नाम सामने आने से बढ़ी हलचल
खुशलोक अस्पताल (khushlokhospital ) के संचालक डॉ. विनोद पागरानी, जो भाजपा नेता हैं और विधानसभा व मेयर चुनावों में टिकट के मजबूत दावेदार भी रहे हैं, इस विवाद के केंद्र में आ गए हैं। मामला सामने आने के बाद जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने पूरी जानकारी से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें अस्पताल में किसी लंगूर के बांधे होने की खबर ही नहीं।
यह भी पढ़ें:- पीलीभीत पावर ट्रांसफार्मर कांड: दो अधिशासी अभियंता सस्पेंड, लेकिन ‘इन’ पर मेहरबानी क्यों?
यह भी पढ़ें:- कैनविज कंपनी का कैश जाल! कन्हैया गुलाटी गायब, निवेशकों के करोड़ों फंसे
लेकिन स्थानीय लोगों ने बिल्कुल उल्टा दावा किया। उनका कहना है लंगूर काफी समय से इसी तरह बंधा हुआ है। अस्पताल के लोग देखते हैं लेकिन कोई रोकने-टोकने वाला नहीं। लोगों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन इस स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज करता रहा।
DFO ने भेजी दबिश, रेंजर को जांच के आदेश
जैसे ही मामला सोशल मीडिया और स्थानीय शिकायतों के जरिए वन विभाग तक पहुंचा, DFO दीक्षा भंडारी हरकत में आ गईं। उन्होंने तुरंत रेंजर वैभव चौधरी को खुशलोक अस्पताल भेज कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए।
वन विभाग की टीम ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। लंगूर को कब्जे में लेकर सुरक्षित स्थान पर भेजा जा सकता है। अगर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही साबित हुई तो Wildlife Protection Act, 1972 के तहत कड़ी कार्रवाई होने की पूरी संभावना है।
क्या कहता है कानून?
भारत में लंगूर संरक्षित प्रजाति है। Wildlife Protection Act, 1972 के अनुसार:
- लंगूर को बांधकर रखना, कैद करना या पालतू बनाना अपराध
- दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों
- जंगली जीव को यातना पहुँचाना भी दंडनीयस्पष्ट है कि अस्पताल के पोर्च पर लंगूर को बांधकर रखना सीधा-सीधा कानून का उल्लंघन है।
वन मंत्री भी इसी जिले से — फिर भी वन्यजीव संरक्षण फेल?
खुशलोक अस्पताल का ये मामला इसलिए और सुर्खियों में है क्योंकि प्रदेश के वन मंत्री भी बरेली जिले से ही आते हैं। बावजूद इसके, एक संरक्षित वन्यजीव के साथ ऐसी क्रूरता खुलेआम होती रही और विभाग को भनक तक नहीं लगी। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं जब नेता खुद कानून तोड़ेंगे, तो आम आदमी से नियम पालन की उम्मीद कैसे की जाएगी?
लोगों में आक्रोश, वीडियो वायरल
लंगूर की जंजीर में जकड़ी हालत की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। लोग खुशलोक अस्पताल अस्पताल प्रशासन की आलोचना करते हुए कड़े शब्दों में नाराजगी जता रहे हैं। एक राहगीर ने कहा कि अस्पताल इलाज की जगह है, यातना की नहीं। यह जानवर है, कोई सजावट की चीज नहीं।










