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बरेली PWD टेंडर घोटाला: किला पुल–सिटी स्टेशन रोड की निविदा अचानक रद्द, ठेकेदारों की लाखों की EMD फँसी

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बरेली PWD टेंडर घोटाला

बरेली। लोक निर्माण विभाग (PWD) प्रांतीय खंड, बरेली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार किला पुल–सिटी रेलवे स्टेशन रोड की CC सड़क के पुनर्निर्माण से जुड़े करोड़ों के टेंडर को अचानक रद्द कर दिया गया। इससे न सिर्फ निर्माण कार्य अधर में लटक गया, बल्कि सात फर्मों की लाखों रुपये की EMD (जमानत राशि) भी अटक गई है। ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि यह पूरा मामला एक “चहेती फर्म” को लाभ पहुँचाने का असफल प्रयास है।

बरेली PWD टेंडर घोटाला
सात फर्में तकनीकी रूप से योग्य फिर भी अचानक रद्द किया टेंडर

टेंडर रद्द होने पर बढ़े सवाल, ठेकेदारों में नाराजगी

PWD के करीब 4.50 करोड़ रुपये के इस टेंडर के लिए 15 नवंबर को टेक्निकल बिड खोली गई।आश्चर्यजनक रूप से सभी सात फर्में तकनीकी रूप से योग्य निकलीं। इसी के बाद विभागीय स्तर पर हलचल शुरू हो गई। सूत्रों के अनुसार अधिशासी अभियंता भगत सिंह ने उसी दिन निविदा रद्द करने का प्रस्ताव भेज दिया। अधीक्षण अभियंता प्रकाश चंद्र ने भी बिना किसी जांच या कारण बताए तुरंत निविदा रद्द कर दी। दो घंटे से भी कम समय में हुई कार्रवाई ने ठेकेदारों के संदेह को और गहरा कर दिया।

PWD: चहेती फर्म को फायदे की कोशिश का आरोप

विभागीय सूत्र दावा करते हैं कि टेंडर को एक खास फर्म के लिए “सेट” किया जा रहा था।
कहा गया कि मुख्यालय से मौखिक निर्देश हैं कि यह कार्य एक ही ठेकेदार को देना है। बाकी कोई टेंडर न डाले। कुछ ठेकेदार दबाव में आ गए, लेकिन सात फर्मों ने चेतावनी को नजरअंदाज करके टेंडर डाल दिया। यहीं से पूरा खेल बिगड़ गया और टेंडर निरस्त कर दिया गया।

PWD: लाखों की जमानत राशि अटकी, विभाग चुप

एक टेंडर में ठेकेदार का खर्च सिर्फ फॉर्म भरने तक सीमित नहीं होता। इसमें डॉक्यूमेंट फीस
हलफनामे और दस्तावेज, तकनीकी तैयारी, बैंक गारंटी और EMD सभी पर मोटा खर्च होता है।
इस टेंडर में ठेकेदारों ने 20–25 लाख रुपये तक EMD जमा की थी। अब सवाल उठ रहे है कि क्या विभाग EMD पर ब्याज देगा? क्या डॉक्यूमेंट फीस लौटाई जाएगी? बिना कारण बताए टेंडर क्यों रद्द हुआ? और क्या जिम्मेदार अभियंताओं पर कार्रवाई होगी? विभाग की चुप्पी इन सवालों को और तूल दे रही है। यही नही अफसर इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देने से बच रहे। मामले पर पक्ष जानने के लिए अधिशासी अभियंता भगत सिंह को फोन किया लेकिन वह लगातार व्यस्त मिला। अधीक्षण अभियंता प्रकाश चंद्र ने कॉल रिसीव नहीं की। सूत्रों का कहना है कि संबंधित अधिकारी मीडिया से दूरी बना रहे हैं।

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