" लोकतंत्र टुडे "

बरेली: बिजली विभाग में करोड़ों का खेल, बिल रिवीजन घोटाले का मास्टरमाइंड अधिशासी अभियंता

Picture of Sanjeev Sharma

Sanjeev Sharma

FOLLOW US:

बरेली: बिजली विभाग में करोड़ों का खेल

बरेलीबिजली विभाग में ईमानदारी के दावे एक बार फिर कागजों तक ही सीमित साबित हुए हैं। उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में “रिवीजन” के नाम पर करोड़ों रुपये के खेल की परतें खुलती जा रही हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे यह साफ होता गया कि इस पूरे खेल का असली सूत्रधार तत्कालीन अधिशासी अभियंता (थर्ड डिवीजन) अनुज गुप्ता था। बाद में आए सुरेन्द्र सिंह ने इस खेल को आगे बढ़ाया, लेकिन पटकथा, किरदार और तरीका पहले ही तय हो चुका था।

यह भी पढ़ें:-  फाइलों का जिन्न, बोतलों की खनक और बुझी हुई बत्ती

सूत्रों के मुताबिक, अनुज गुप्ता के कार्यकाल में उपभोक्ताओं से “सीधे बिल जमा कराने” के नाम पर एकमुश्त मोटी रकम वसूली जाती थी। इसके बाद विभागीय पोर्टल पर बिल को रिवाइज कर नाममात्र की राशि दिखा दी जाती और उपभोक्ता को औने-पौने की रसीद थमा दी जाती थी। उपभोक्ता को समझाया जाता था आपका भी फायदा, और हमारा भी। असल नुकसान होता था विभाग का, जिसे करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा था।

इस पूरे खेल में अनुज गुप्ता अकेले नहीं थे। एक कंप्यूटर ऑपरेटर और एक विभागीय बाबू की मिलीभगत से पोर्टल पर बिलों में हेरफेर किया जाता रहा। विभाग के अंदरखाने यह खेल लंबे समय तक बेरोकटोक चलता रहा, जब तक कि शिकायतों का अंबार अधीक्षण अभियंता ब्रह्मपाल के पास नहीं पहुंचा।

बरेली: बिजली विभाग में करोड़ों का खेल
बरेली: बिजली विभाग में करोड़ों का खेल

144 मामलों में गड़बड़ी, 67 लाख से ज्यादा का नुकसान

जांच शुरू हुई तो शुरुआती दौर में ही 144 बिजली बिलों में संशोधन कर रकम घटाने के मामले पकड़ में आ गए। इन मामलों में कुल 67,02,408 रुपये की रकम घटाई गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि इनमें से 9 मामले अनुज गुप्ता के कार्यकाल के थे, जिनमें 17,34,445 रुपये की हेराफेरी सामने आई। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जांच में अनुज गुप्ता के कार्यकाल का केवल सीमित हिस्सा ही शामिल किया गया था, अगर पूरी अवधि खंगाली जाए तो आंकड़ा और भी चौंकाने वाला हो सकता है।

अनुज गुप्ता के बाद जब थर्ड डिवीजन की कमान सुरेन्द्र सिंह को मिली, तो खेल और रफ्तार पकड़ गया। उनके कार्यकाल में 135 मामले पकड़ में आए, जिनमें 49,67,963 रुपये की रकम कम की गई थी। साफ है कि नींव अनुज गुप्ता ने रखी और बाद में इसे खुलेआम आगे बढ़ाया गया।

बिल दोबारा जोड़ने के निर्देश, लेकिन तभी चला ट्रांसफर कार्ड

अधीक्षण अभियंता ब्रह्मपाल ने गड़बड़ी पकड़ में आते ही सख्ती दिखाई और अधिशासी अभियंता (कॉमर्शियल वर्टिकल सेकेंड) सतेंद्र चौहान को निर्देश दिए कि कम की गई रकम उपभोक्ताओं के खातों में दोबारा जोड़ी जाए। इसके बाद उपभोक्ताओं के संशोधित बिलों में अचानक बढ़ी हुई रकम देखकर हड़कंप मच गया।

मामला गंभीर मोड़ ले ही रहा था कि तभी एक “पावरफुल इंजीनियर” सक्रिय हो गया। देखते ही देखते अधीक्षण अभियंता ब्रह्मपाल का ट्रांसफर करा दिया गया। विभाग में यह संदेश फैलाने की कोशिश की गई कि इस ट्रांसफर के पीछे मुख्य अभियंता का हाथ है, ताकि असली खेल दब जाए और मामला दो अफसरों की आपसी जंग बनकर रह जाए।

चर्चा यह भी है कि ट्रांसफर से ठीक दो-तीन दिन पहले कुछ संदिग्ध लोग “चाय पार्टी” के बहाने अधीक्षण अभियंता के दफ्तर पहुंचे थे, ताकि किसी को शक न हो और अंदरखाने की साजिश को अंजाम दिया जा सके।

सवालों के घेरे में विभाग

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अनुज गुप्ता जैसे अफसरों पर सिर्फ कागजी कार्रवाई होगी या वाकई उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी? क्या करोड़ों के इस खेल के असली मास्टरमाइंड तक जांच पहुंचेगी या मामला एक बार फिर फाइलों में दबा दिया जाएगा?
फिलहाल इतना तय है कि बिजली बिल रिवीजन का यह घोटाला सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि विभाग की साख पर करारा तमाचा है और इस तमाचे की गूंज अभी और दूर तक जानी बाकी है।

Leave a Comment

और पढ़ें