बरेली। बीसलपुर रोड अब भले ही नेशनल हाईवे की चमक में नहा गया हो, लेकिन इस मार्ग पर आबकारी नियमों की स्याही फीकी पड़ गई है। सड़क के दोनों ओर जहां तेज रफ्तार गाड़ियां फर्राटा भर रही हैं, वहीं किनारे-किनारे शराब की दुकानें भी नियमों को ठेंगा दिखाते हुए खुली पड़ी हैं। हैरानी की बात यह है कि विभाग की आंखों के सामने यह सब कुछ ऐसे चल रहा है मानो सबकुछ नियमों के तहत हो।
बरेली बीसलपुर रोड पर शराब की दुकानें
आबकारी विभाग का साफ नियम है कि किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग से 220 मीटर की दूरी पर ही शराब की दुकान चल सकती है। लेकिन बरेली जिले की सीमा में बड़ा बाईपास से लेकर बीसलपुर तक ऐसा लगता है मानो नियमों को ‘220 मीटर’ नहीं, ‘220 फीट’ भी याद नहीं रहा। सड़क से सटी आधा दर्जन से ज्यादा देशी और अंग्रेजी शराब की दुकानें पूरी बेशर्मी से अपना कारोबार चमका रही हैं।
पीलीभीत ने किया नियम पालन, बरेली बना ‘अपवाद’
जानकारों का कहना है कि यही सड़क जब पीलीभीत जिले की सीमा में पहुंचती है, तो वहां के आबकारी अधिकारियों ने नियमों की लकीर पर चलते हुए सभी दुकानों को 220 मीटर दूर शिफ्ट करा दिया। लेकिन बरेली में मामला बिल्कुल उलटा है। यहां आबकारी अफसर और शराब कारोबारी जैसे एक ही गिलास से ‘सिस्टम’ पी रहे हों।
बरेली बीसलपुर रोड शराब दुकानें
दुकानों के अनुबंध के समय सड़क का नाम और दूरी स्पष्ट दर्ज होती है, लेकिन बरेली में यह फाइलों की धूल में दबा हुआ सच बन चुका है। विभाग की खामोशी से लगता है मानो सब कुछ पहले से तयशुदा खेल हो, राजस्व का जाम चढ़ाते-चढ़ाते नियमों को नशे में भुला दिया गया।
सवालों के घेरे में आबकारी विभाग
अब बड़ा सवाल यही है कि जब बीसलपुर रोड को एनएच का दर्जा मिल चुका है, तो आबकारी विभाग ने अब तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या नियमों की किताब सिर्फ छोटे कस्बों और गरीब ठेकेदारों के लिए है? स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर शराब की दुकानें आए दिन हादसों की वजह भी बन रही हैं। रात में तेज़ रोशनी और शराबी ड्राइवर मिल जाएं, तो सड़क पर मौत खुद घूमती नजर आती है।
अफसर बोले—जांच होगी
इस पूरे मामले में जब जिला आबकारी अधिकारी हुकम सिंह से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में जांच कराई जाएगी कि क्या बरेली-बीसलपुर रोड एनएच बन चुकी है। यदि दुकानें नियम विरुद्ध तरीके से एनएच पर चल रही हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, यह बयान भी सवालों से घिरा है जब सड़क एनएच घोषित हो चुकी है और इसका नोटिफिकेशन महीनों पहले जारी हो चुका है, तो विभाग अब तक ‘जांच’ की नींद में क्यों था?
कागजों की जांच या सख्त कार्रवाई?
अब देखना यह होगा कि आबकारी विभाग की यह जांच कागजों में फाइलों का बोझ बढ़ाती है या वाकई में हाईवे किनारे चल रही शराब दुकानों पर शिकंजा कसती है। फिलहाल, बरेली में बीसलपुर रोड की हालत देखकर यही कहा जा सकता है कि यहां सड़क पर रफ्तार की नहीं, नियमों की ब्रेक फेल है।