बरेली। भोजीपुरा-अगरास शंका नदी पर बने पुल घोटाले में अब ठेकेदारों की सीधी भिड़ंत शुरू हो गई है। करोड़ों के भुगतान विवाद ने मामला न सिर्फ विभाग के दफ्तरों में उथल-पुथल मचा दी है, बल्कि अब नोटिस और अदालत के दरवाज़े तक पहुंच गया है। पुल निर्माण का ठेका जल आकाश कंस्ट्रक्शन और कैलाश कंस्ट्रक्शन कंपनी को ज्वाइंट वेंचर के रूप में मिला था, लेकिन अब यही साझेदारी विवाद में तब्दील हो गई है। भोजीपुरा पुल घोटाला अभी शांत नहीं हुआ कि विभाग के भीतर चर्चा है कि क्या जल आकाश और कैलाश दोनों को पुल निर्माण का अनुभव था या नहीं। अगर अनुभव नहीं था, तो ठेका इतना बड़ा कैसे दे दिया गया?
भोजीपुरा पुल घोटाला: 60:40 की साझेदारी, भुगतान में गड़बड़ी
इंजीनियरों पर गंभीर आरोप
कैलाश कंस्ट्रक्शन कंपनी ने लोक निर्माण विभाग के कई इंजीनियरों के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। कंपनी का कहना है कि विभागीय अफसरों ने ज्वाइंट वेंचर अनुबंध के नियमों का उल्लंघन करते हुए सारा भुगतान एक ही कंपनी को दे दिया। सूत्रों के मुताबिक, विभाग के एक इंजीनियर ने कैलाश कंपनी के प्रतिनिधि को धमकाते हुए कहा “तेरी वजह से मामला तूल पकड़ रहा है, चुप रहो तो बेहतर होगा।”
नियमों की अनदेखी से खुला बड़ा खेल
नोटिस तक पहुंचा विवाद
विभाग से जवाब न मिलने पर कैलाश कंस्ट्रक्शन कंपनी अब कानूनी लड़ाई की तैयारी में जुट गई है। कंपनी ने विभाग को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है और इंजीनियरों पर धोखाधड़ी व साजिश का आरोप लगाया है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यह मामला थाने या न्यायालय में दर्ज शिकायत के रूप में सामने आ सकता है।
शासन तक पहुंचा भोजीपुरा पुल घोटाला
सूत्र बताते हैं कि वित्तीय और तकनीकी जांच के आदेश किसी भी वक्त जारी हो सकते हैं। अगर जांच बैठी, तो ठेका प्रक्रिया से लेकर भुगतान तक कई बड़े इंजीनियरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
पुरानी एमबी फिर से जांच के घेरे में
इससे पहले लोकतंत्र टुडे की जांच में खुलासा हुआ था कि फरवरी माह की एमबी (माप पुस्तिका) न तो भरी गई थी, और न ही उसके पन्ने पूरे छोड़े गए थे। अब जब ठेकेदारों की जंग खुलकर सामने आई है, तो विभाग के अंदर पुरानी फाइलें फिर से खंगाली जा रही हैं।
विभाग में सन्नाटा, अफसरों में खौफ
भोजीपुरा पुल घोटाला: केवल एडवांस भुगतान का मामला नहीं











