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भोजीपुरा पुल घोटाला: ठेकेदारों की भिड़ंत — 60:40 की साझेदारी में करोड़ों का खेल, इंजीनियरों पर आरोपों की बौछार!

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Sanjeev Sharma

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भोजीपुरा पुल घोटाला

बरेली। भोजीपुरा-अगरास शंका नदी पर बने पुल घोटाले में अब ठेकेदारों की सीधी भिड़ंत शुरू हो गई है। करोड़ों के भुगतान विवाद ने मामला न सिर्फ विभाग के दफ्तरों में उथल-पुथल मचा दी है, बल्कि अब नोटिस और अदालत के दरवाज़े तक पहुंच गया है। पुल निर्माण का ठेका जल आकाश कंस्ट्रक्शन और कैलाश कंस्ट्रक्शन कंपनी को ज्वाइंट वेंचर के रूप में मिला था, लेकिन अब यही साझेदारी विवाद में तब्दील हो गई है। भोजीपुरा पुल घोटाला अभी शांत नहीं हुआ कि विभाग के भीतर चर्चा है कि क्या जल आकाश और कैलाश दोनों को पुल निर्माण का अनुभव था या नहीं। अगर अनुभव नहीं था, तो ठेका इतना बड़ा कैसे दे दिया गया?

भोजीपुरा पुल घोटाला: 60:40 की साझेदारी, भुगतान में गड़बड़ी

सूत्रों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में जल आकाश कंपनी की 60 फीसदी और कैलाश कंस्ट्रक्शन कंपनी की 40 फीसदी भागीदारी तय थी। दोनों ने मिलकर ज्वाइंट वेंचर की डीड बनाई।
लेकिन जब भुगतान की बारी आई, तो विभाग ने करीब 22.55 करोड़ रुपये सीधे जल आकाश कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिए।

इंजीनियरों पर गंभीर आरोप

कैलाश कंस्ट्रक्शन कंपनी ने लोक निर्माण विभाग के कई इंजीनियरों के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। कंपनी का कहना है कि विभागीय अफसरों ने ज्वाइंट वेंचर अनुबंध के नियमों का उल्लंघन करते हुए सारा भुगतान एक ही कंपनी को दे दिया। सूत्रों के मुताबिक, विभाग के एक इंजीनियर ने कैलाश कंपनी के प्रतिनिधि को धमकाते हुए कहा “तेरी वजह से मामला तूल पकड़ रहा है, चुप रहो तो बेहतर होगा।”

नियमों की अनदेखी से खुला बड़ा खेल

लोक निर्माण विभाग के नियमों के तहत किसी भी ज्वाइंट वेंचर में जॉइंट वेंचर का संयुक्त बैंक खाता और नया जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है। भुगतान भी उसी संयुक्त खाते में होना चाहिए। दोनों फर्मो के पास हिस्सेदारी के अनुपात में अनुभव और कार्य का भी आवंटन होगा लेकिन भोजीपुरा अगरास मार्ग के पुल प्रोजेक्ट में यह प्रक्रिया पूरी तरह नजरअंदाज कर दी गई।अब विभागीय गलियारों में सवाल गूंज रहा है, जब नियम साफ थे, तो फिर भुगतान एक ही कंपनी को क्यों किया गया?

नोटिस तक पहुंचा विवाद

विभाग से जवाब न मिलने पर कैलाश कंस्ट्रक्शन कंपनी अब कानूनी लड़ाई की तैयारी में जुट गई है। कंपनी ने विभाग को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है और इंजीनियरों पर धोखाधड़ी व साजिश का आरोप लगाया है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यह मामला थाने या न्यायालय में दर्ज शिकायत के रूप में सामने आ सकता है।

शासन तक पहुंचा भोजीपुरा पुल घोटाला

मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने विभाग से रिपोर्ट तलब की है।
सूत्र बताते हैं कि वित्तीय और तकनीकी जांच के आदेश किसी भी वक्त जारी हो सकते हैं। अगर जांच बैठी, तो ठेका प्रक्रिया से लेकर भुगतान तक कई बड़े इंजीनियरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

पुरानी एमबी फिर से जांच के घेरे में

इससे पहले लोकतंत्र टुडे की जांच में खुलासा हुआ था कि फरवरी माह की एमबी (माप पुस्तिका) न तो भरी गई थी, और न ही उसके पन्ने पूरे छोड़े गए थे। अब जब ठेकेदारों की जंग खुलकर सामने आई है, तो विभाग के अंदर पुरानी फाइलें फिर से खंगाली जा रही हैं।

विभाग में सन्नाटा, अफसरों में खौफ

लोकतंत्र टुडे के लगातार खुलासों के बाद विभागीय दफ्तरों में खामोशी छाई है। बताया जा रहा है कि एक इंजीनियर ने तो अपने कमरे में बाहर वालों का प्रवेश तक बंद कर दिया है। उसे डर है कि कहीं कोई कर्मचारी उसकी बात रिकॉर्ड न कर ले या फाइल की कॉपी बाहर न पहुंचा दे।

भोजीपुरा पुल घोटाला: केवल एडवांस भुगतान का मामला नहीं

भोजीपुरा पुल घोटाला ठेकेदारों, इंजीनियरों और विभागीय अफसरों के बीच की साजिश की ऐसी कहानी बन चुका है, जिसकी गूंज अब सीधे शासन के गलियारों तक पहुंच चुकी है। इस मामले में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता से लेकर बिना एमबी के बिल भुगतान और बिना वैध जॉइंट वेंचर फर्म बने एक फर्म को भुगतान किये जाने में बाबू से लेकर इंजीनियरों तक का फंसना तय है।

 

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