बरेली। भोजीपुरा-अगरास रोड पर बन रहे शंका पुल प्रोजेक्ट में बड़ा घोटाला सामने आया है। लोकतंत्र टुडे की एक्सक्लूसिव जांच में खुलासा हुआ है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से भोजीपुरा पुल घोटाला कर अधूरे काम का पूरा भुगतान कर दिया गया।
पुल का ठेका जल आकाश–कैलाश कंस्ट्रक्शन ज्वाइंट वेंचर को मिला था। इसमें जल आकाश के 60% और कैलाश कंस्ट्रक्शन के 40% शेयर थे। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, फिजिकल वेरिफिकेशन के बिना बारहवां बिल पास कर दिया गया और ठेकेदार को लाखों रुपये का एडवांस भुगतान कर दिया गया।
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4 अप्रैल को अधिशासी अभियंता भगत सिंह जब साइट पर पहुंचे, तब तक पुल का बड़ा हिस्सा अधूरा था वियरिंग स्लैब, विंग वाल, बैकवॉल और पैराफिट तक नहीं बने थे। इसके बावजूद ठेकेदार को लगभग पूरा भुगतान पहले ही जारी हो गया था।
PWD नियमों के अनुसार, भुगतान से पहले जेई द्वारा एमबी (मेजरमेंट बुक) भरना जरूरी है, लेकिन भोजीपुरा में यह प्रक्रिया कागजों पर ही पूरी दिखा दी गई। खुलासे के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, कई इंजीनियरों पर चार्जशीट और सस्पेंशन की तलवार लटक रही है।
अधिशासी अभियंता भगत सिंह ने कहा “अगर बिना एमबी भरे बिल पास हुआ है, तो आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” यह मामला फिर एक बार साबित करता है कि जनता के टैक्स के पैसों से भ्रष्टाचार का पुल खड़ा किया जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या सच में कार्रवाई होगी या फाइलें फिर अलमारी में बंद हो जाएंगी।











