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3 महीनों में 2 विवाद! रूहेलखंड नहर के अधिशासी अभियंता सर्वेश चन्द्र सिन्हा बोलेरो विवाद में घिरे, विभागीय नियमों की उल्लंघना से राजस्व को भारी नुकसान

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Sanjeev Sharma

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रूहेलखंड नहर के अधिशासी अभियंता सुरेश चन्द्र बोलेरो विवाद में फंसे

बरेलीरूहेलखंड नहर खंड में तैनात अधिशासी अभियंता सर्वेश चन्द्र एक बार फिर विवादों में हैं। मंत्री के निरीक्षण के दौरान सौ साल पुराने ट्रैक्टर का तमाशा दिखाकर वाहवाही लूटने वाले इस अधिकारी पर अब निजी बोलेरो के इस्तेमाल का आरोप लगा है। जानकारों का कहना है कि अधिशासी अभियंता की इस मनमानी से परिवहन विभाग को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है, क्योंकि उपयोग में ली जा रही बोलेरो टैक्सी परमिट वाली गाड़ी नहीं है।

रूहेलखंड नहर के अधिशासी अभियंता सुरेश चन्द्र बोलेरो विवाद में फंसे

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ठेके की टैक्सी हटाई, निजी बोलेरो से सफर शुरू

करीब तीन महीने पहले सर्वेश चन्द्र सिन्हा ने ( Rohilkhand Canal Divison Bareilly ) कार्यभार संभाला था। विभाग में पहले जो भी अधिकारी रहे, वे ठेके पर ली गई टैक्सी परमिट गाड़ी से दफ्तर आते-जाते थे।
लेकिन सुरेश चन्द्र ने कार्यभार ग्रहण करते ही ठेके की गाड़ी हटा दी और बिना कारण बताए निजी बोलेरो से सफर शुरू कर दिया।

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सूत्रों के मुताबिक, बोलेरो गाड़ी का नंबर निजी उपयोग का है, टैक्सी परमिट नहीं है, जिससे विभाग को ट्रांसपोर्ट टैक्स और लाइसेंस फीस का राजस्व नुकसान हो रहा है।
विभागीय कर्मचारियों को यह भी नहीं पता कि बोलेरो किसकी है, क्या किसी ठेकेदार की, या अधिशासी अभियंता के किसी करीबी की?

भुगतान पर भी उठ रहे सवाल

अब तक बोलेरो के नाम पर विभाग से कोई भुगतान नहीं किया गया है। फिर भी गाड़ी लगातार विभागीय उपयोग में है, जो सरकारी नियमों के विरुद्ध है। सूत्र बताते हैं कि बिना अनुबंध या बिलिंग के निजी वाहन का प्रयोग न केवल विभागीय आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि राजकोष को भी नुकसान पहुंचाता है।

मंत्री के निरीक्षण में किया था ट्रैक्टर तमाशा

बीते दिनों विभागीय मंत्री ने रूहेलखंड नहर भवन का निरीक्षण किया था। इस दौरान अधिशासी अभियंता ने मंत्री को सौ साल पुराना ट्रैक्टर दिखाया और इसे विभाग की धरोहर बताकर वाहवाही लूटने की कोशिश की। इस “ट्रैक्टर तमाशे” की चर्चा पूरे विभाग में आज भी जारी है।

नियमों की अनदेखी से दोहरा नुकसान

जानकारों का कहना है कि सरकारी पद पर रहते हुए किसी निजी वाहन का उपयोग बिना अनुमति सेवा नियमों का उल्लंघन है। इसके अलावा, बिना टैक्सी परमिट वाली गाड़ी का सरकारी कार्य में प्रयोग परिवहन विभाग के राजस्व को सीधा नुकसान पहुंचाता है। कानूनन, यदि कोई निजी गाड़ी व्यावसायिक कार्य (सरकारी या ठेके) में इस्तेमाल होती है,
तो उस पर कमर्शियल टैक्स और बीमा शुल्क देना अनिवार्य है — जो इस मामले में नहीं हुआ है।

सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मामला

इस विवाद ने विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग जुड़े लोगों का कहना है कि अगर अधिशासी अभियंता की बोलेरो ठेके पर नहीं है, तो यह मामला सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और राजस्व हानि से जुड़ा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो अधिशासी अभियंता पर विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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