बरेली: उत्तर प्रदेश के रूहेलखंड नहर खंड ( Ruhelkhand Nahar Division) में हालात गंभीर रूप से बिगड़ गए हैं। नए अधिशासी अभियंता के आने के बाद Kichha मुख्यालय में नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ रही हैं। आम कर्मचारियों का कहना है कि वे रोजमर्रा के कामकाज में दबाव और असुरक्षा महसूस कर रहे हैं, जबकि कुछ चहेते अफसर और कर्मचारी खुलेआम मनमानी कर रहे हैं। शासन के आदेश अब केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।

मुख्यालय छोड़कर Ruhelkhand Nahar Division बरेली में ऑफिस
उत्तराखंड स्थित Kichha का First Sub-Division Headquarters हमेशा से संवेदनशील माना गया है। यहां तैनात एसडीओ प्रथम कमल किशोर गोले को नियमतः Kichha में बैठकर काम करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने आदेशों की अवहेलना करते हुए जिला मुख्यालय Bareilly में अपना ऑफिस खोल लिया। एई थर्ड ऑफिस के पीछे एक कमरे पर कब्जा करके फाइलें निपटाना शुरू कर दिया गया। नतीजा यह कि Kichha Headquarters empty रह गया और विभागीय काम प्रभावित हो रहे हैं।
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Ruhelkhand Nahar Division में शासनादेश की अनदेखी
रूहेलखंड नहर खंड के तत्कालीन अधिशासी अभियंता नवीन कुमार ने सभी एसडीओ को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे अपने मुख्यालय पर ही बैठें। लेकिन अब यह आदेश बेअसर साबित हो रहे हैं। नए अधिशासी अभियंता सर्वेश चन्द्र के आने के बाद से विभाग में अनुशासन और सामंजस्य पूरी तरह ढह गए हैं।
देर शाम तक रौनक, कामकाज ठप
रूहेलखंड नहर खंड विभाग का दफ्तर देर शाम तक गुलजार रहता है। अफसर और चहेते कर्मचारी मौजूद हैं, लेकिन कामकाज प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि आदेशों का पालन केवल दबाव बनाने के लिए होता है, जबकि पसंदीदा लोगों को छूट दी जाती है। यही कारण है कि employee issues और असंतोष लगातार बढ़ रहे हैं।
उठ रहे सवाल
- जब शासन ने मुख्यालय छोड़ने पर रोक लगाई है, तो एसडीओ खुलेआम नियम कैसे तोड़ रहे हैं?
- संवेदनशील Kichha Headquarters की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है?
- अधिशासी अभियंता स्तर पर यह मनमानी क्यों बर्दाश्त की जा रही है?
विभाग की साख पर असर
Ruhelkhand Nahar Division पहले से ही घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों में सुर्खियों में रहा है। अब अधिकारियों की मनमानी ने विभाग की साख को और कमजोर कर दिया है। संवेदनशील मुख्यालय को खाली छोड़ने से किसानों और आम जनता से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं।
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कर्मचारियों की नाराजगी
आम कर्मचारी मानते हैं कि विभाग में नियमों का पालन केवल दिखावा है। बड़े अधिकारी मनमर्जी करते हैं और अनुशासन खोखला हो गया है। कर्मचारी दबाव और भय में काम करने को मजबूर हैं, जबकि चहेते अफसर और कर्मचारी पूरी छूट का आनंद ले रहे हैं।अगर मुख्यालय छोड़ने की यह परंपरा इसी तरह जारी रही, तो Ruhelkhand Nahar Division में अनुशासन पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा। कर्मचारी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शासन इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा।











