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चंद्रशेखर आजाद ने यूपी और केंद्र सरकार पर साधा निशाना, बोले – विकास नहीं विनाश का रास्ता

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चंद्रशेखर आजाद

बरेली। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बुधवार को बरेली में प्रबुद्धजन सम्मेलन में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज की सरकार विकास के रास्ते पर नहीं, बल्कि विनाश के रास्ते पर बढ़ रही है। सांसद ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में संवेदनाएं पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वाराणसी में जन्म के दो घंटे बाद नवजात शिशु और उसकी मां को अस्पताल से निकाल दिया गया। ऐसे घटनाक्रम से साफ हो गया कि इस सरकार में आम आदमी की सुरक्षा, गरीबों की परेशानियां और मानवता का कोई मूल्य नहीं रह गया।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा, “मुसलमानों पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं। कमजोर वर्ग के लोगों के अधिकारों को छीना जा रहा है। देश में हालात नेपाल जैसे बनते जा रहे हैं। सरकार से लोगों का भरोसा उठ चुका है।” उन्होंने कहा कि देश की सरकार चांद पर जाने की बातें तो करती है, लेकिन जमीन पर हकीकत बहुत अलग है। उन्होंने जातिगत जनगणना पर भी बल दिया और कहा कि यह केवल संख्या का खेल नहीं होना चाहिए, बल्कि आर्थिक गणना भी शामिल की जाए। सांसद ने जोर देकर कहा कि मंडल कमीशन की सारी सिफारिशें लागू होनी चाहिए ताकि समाज के पिछड़े वर्ग को उचित सम्मान और अवसर मिल सके।

संविधान पर खतरे की बात करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा, “हम आज संविधान की वजह से सुरक्षित हैं। इसी संविधान ने आम हेडमास्टर के बेटे को संसद का सांसद बनाया है। लेकिन लगातार सरकारी विभाग बेचे जा रहे हैं और नौकरियां समाप्त की जा रही हैं। यह निकम्मी व्यवस्था आम लोगों की बेड़ियां बन गई है।”

चुनाव व्यवस्था पर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा, “लंबे समय से ईवीएम से चुनाव हो रहे हैं, जिससे जनता का भरोसा लगातार कम हो रहा है। अब समय आ गया है कि चुनाव बैलेट पेपर से करवाए जाएं ताकि लोकतंत्र सशक्त और पारदर्शी बन सके।”

किसानों की समस्याओं पर भी उन्होंने ध्यान दिलाया। कहा कि न तो पर्याप्त जमीन बची है, न फसल। छुट्टा पशु फसलें बर्बाद कर रहे हैं, और गुलदार की वजह से किसान खेत में जाने से भी डर रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि बिजनौर में एक आठ साल के बच्चे को गुलदार ने मार डाला, फिर नौ साल का बच्चा, फिर एक महिला। उन्होंने सवाल उठाया – क्या गरीबों, मजदूरों और किसानों की जिंदगी का कोई महत्व नहीं?

संतों पर निशाना साधते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा, “कुछ ऐसे लोग हैं, जो खुद को संत कहकर मिनी पाकिस्तान की बातें कर रहे हैं। बचपन से अपनी आंखें नहीं दिखाई देने की बात करने वाले ऐसे लोगों से जनता को दूर रहना चाहिए।”

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